Wednesday, June 18, 2008

चीन के लिए वामपंथियों का शक्तिशाली प्रेम

भारत की राजनीति में अशिक्षित मनुष्यों के प्रवेश ने इस सेवा को प्रदूषित कर दिया है. भारतीय राजनीति के अपराधिकरण ने इस पेशे को, जो हिन्दुस्तानी स्वतंत्रता की युग में एक सम्मानजनक पेशा था, बदनामी और जिल्लत के अलावा और कुछ नहीं सौपा है . स्थिती भले ही शर्मनाक हो, लेकिन थोड़े चमकते हूए तारे, अर्थार्त नेता, अब भी मौजूद है भारत की सियासत में जो ईस राष्ट्र की आवाम के हृदयों को और सिरों को गर्व और खुशी से ऊँचा कर देते है. इसकी वजह है इन नेताओं की साफ-सुथरी छवी और इनके अंतःकरण में अपने वतन की जनता के लिए बहुत स्नेह होना।

चीन से जो ख़तरा भारत को है, उस खतरे को भारतीय सरकार समझ नहीं पा रही है। यह दुर्भाग्यपूर्ण बात है. इस रणनीती से भारत को फायदा कम ही मिलेगा. कई नुकसानों का सामना करना पडेगा. अक्टूबर १९६२ में धोके से हूए संग्राम के कारण हिंदुस्तान चीन के इरादों पर भरोसा नहीं कर सकता. उस युद्ध के पश्चात् भी चीन की मानसिकता में कोई भारी बदलाव नहीं देखने को मिला है. आज भी चीन का अरुणाचल प्रदेश पर दावा है. सिक्किम पर भारतीय सरकार के शासन को भी स्पष्ट लब्जों में चीन ने नहीं स्वीकार है. इसलिए भारत को चीन से हमेशा सतर्क रहना चाहिए और चीन के भय पैदा करनेवाले मंसूबों का खात्मा करने के लिए अमेरिका की ओर मित्रता का हाथ बढाना चाहिए. भारत के वामपंथियों का चीन के लिए प्रेम की वजह से आज की भारतीय सरकार अमेरिका से हाथ परमाणु करार को भी सफलतापूर्वक लागू नहीं कर पा रही है. इससे लाभ तो चीन को ही मिलेगा क्योंकि चीन नहीं चाहती कि आनेवाले सालों में भारत एक शक्तिशाली मुल्क़ के जैसे उभरे. भारत के वामपंथियों की दृष्टी को स्वयं की विचारधारा के अलावा और कुछ नजर नहीं आता. उन्हें भारत का कल्याण दिखाई नहीं दे रहा. इससे यह सोच और मजबूत होती है कि वामपंथी दल मिलकर चीन के हित के लिए जी-जान लगाकर श्रम कर रहे है.

नरेंद्र मोदी की सरकार ने सन् २००२ में सत्ता पर अपनी पकड़ मज़बूत करने के पश्चात् गुजरात की प्रजा के लिए काफी प्रस्ताव लागू किये है जो प्रजा के लिए बहुत हद तक फायदेमंद साबित हुए है. लेकिन इस प्रसन्न वास्तविकता को दूरदर्शन पर दिखाया नहीं जाता. यह एक दुखद असलियत है भारत में पत्रकारिता के कुछ भागों की. गुजरात से संबंधित कोई समाचार यदि दिखाया भी जाये, तो वह नकारात्मक ही होगी. जिस मुख्यमंत्री को गुजरात की जनता ने लोकतांत्रिक नियमों का पालन करते हुए चुना, उस मुख्यमंत्री को दानव जैसा बताना, यह किसी जुर्म से कम नहीं. इस मुख्यमंत्री के व्यक्तित्व को राक्षसों से जोड़ना और उनके चरित्र पर निरंतर कीचड़ उछालना, यही देखा गया है ज़्यादातर अंग्रेज़ी भाषा के समाचारपत्रों और न्यूज़ चैनलों में. दर्शकों को गुजरात में चुनाव के पूर्व इस तरह की पत्रकारिता दर्शाके ये अंग्रेज़ी अख़बारों और समाचारों के चैनलों ने उन्हें गलत संदेश भेजा जिसकी मुख्य प्रेरणा थी असत्य और भ्रष्ट धर्मनिरपेक्षता. इन दोहरे मापदंडों की मैं सख्त शब्दों में आलोचना करता हूँ और कामना यही करता हूँ की भविष्य में यह झूठी धर्मनिरपेक्षता के प्रवक्ताओं को अपनी भूल समाज में आयेगी. धर्मनिरपेक्षता का मतलब किसी धार्मिक समुदाय को राजनीतिक प्रलोभन देकर उस धर्म के लोगों से चुनावों में अपने-अपने दलों के फायदे के लिए मत डालने की गुहार करना नहीं है. इस प्रकार की दुष्ट धर्मनिरपेक्षता राष्ट्र में योग्य धर्मनिरपेक्षता के स्तम्बों को चूर-चूर कर देगी और इस देश की विनाश के मार्ग पर यात्रा करवायेगी. धर्मनिरपेक्षता के सही अर्थ को तोड़-मरोड़कर पेश नहीं किया जाना चाहिये और इस पवित्र विचार को इस तरह प्रदूषित करने से हमें बचना चाहिये.

Left's Devotion For China

The description of the nuclear deal by the Indian Leftists as a tactic of the perspicacious Americans to position India as a counterbalance to China is indicative of the vassal mentality of the Leftists.The frightfulness of the Leftists that the nuclear agreement will be inimical to Chinese interests is despicable.The concern of the Leftists that the nuclear pact will be utilised by the Americans to prevent the emergence of China as an international superpower is reflective of the irksomely excessive obsequiousness of the Leftists towards China .Any nationalistic Indian political party will be more bothered about the satiation and fulfilment of Indian strategic objectives to enable India to grow into a transnationally powerful force.The annoyance stems from the reality of the Leftists expressing heartfelt concern at the impact this favourable nuclear deal will have on China .It is not mandatory for any Indian political outfit to be anxious about the consequence India's relationship with other countries will have on Sino-Indian ties.This enslaved mindset of the Leftists is condemnable.